Monday, April 14, 2014

नव वर्षक आ जुड-शितल सिरुवा पर्ब के हार्दिक मंगलमय शुभकामना ।


मेरे प्रिय समस्त देव, चौधरी, पौदार स्वजाति & मित्रगन आप सभी माहनुभाओ का आभिवादन नव वर्ष संवत २०७१ की हार्दिक बधाई  नव वर्ष २०७१ क हार्दिक शुभकामना ।

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सम्पूर्ण मधेश प्रेमी,मधेशी जनता ,स्वजाति,मित्र-गण, भाई, बहन, दोस्त, मधेश के हमारे भाई बहन आ मधेश के अन्य हमारे अत्मजन एबम बिसिस्ट महानुभाब लोग्नी आप सभी को जुड-शितल सिरुवा पर्ब हार्दिक मङ्गलमय शुभकामना जुड-शितल सिरुवा पर्ब के नव उमंगमे नव तरंगमे, अहाँक हृदय नव उत्सवसँ भरए, मनमे शान्ति, सफलता जिवनमे, नव स्वप्नसँ नयन सदति भरल रह………।

जुड-शितल सिरुवा पर्ब के हार्दिक मंगलमय शुभकामना ।नया साल २०७१, जुडशीतल पर्व का हार्दिक मंगलमय शुभकामना सुख, सु-स्वास्थ्य, दिर्घायु, तथा तथा उत्तरोत्तर प्रगतिक कामना हैं... !!!!! जो यू और अपने सपनों को हर तक सफलता मिलती है सूरज के लिए सच हो जाता है बढ़ती...=== 

मधेश के सम्पूर्ण मधेशी जनता, ,स्वजाति,मित्र-गण, भाई, बहन, दोस्त, सभी को जुडशीतल सिरुवा पर्व के हार्दिक मंगलमय शुभकामना सुख, सु-स्वास्थ्य, दिर्घायु, तथा तथा उत्तरोत्तर प्रगतिक कामना हैं... !!!!! जो यू और अपने सपनों को हर तक सफलता मिलती है सूरज के लिए सच हो जाता है बढ़ती...जुड-शितल सिरुवा पर्ब के बरसए हर्ष नितसुख शान्तिक ई नदी बहाबए ।करए मनोरथ पूरा सभकेरजन–जनमे प्रित स्नेह जगाबए ।

।मधेश तराई क्षेत्रक महत्व पूर्ण पर्ब मधेशी वर्ग के जुड-शितल सिरुवा पर्ब के राष्ट्रिय पर्ब के रुपमे अधिराज्य भर बैशाख २ गते के दिन बिदा कायम करु. और मधेश तराई के समस्त मधेशी आ नेपाली वर्ग के जुड-शितल सिरुवा पर्ब के रास्ट्रिय मधेशी बिदा कायम करु और जुड-शितल सिरुवा पर्ब मे मधेशी बिदा कायम करु…जय मधेश जय "नव संवत् मुझे नव संचार भरे जग की नौसेना चांदनी; नव आशा के कलश सजाकर , मंगलमय करे संसार" आप सभी माहनुभाओ का आभिवादन नव वर्ष संवत २०७१ की हार्दिक बधाई नयाँ बर्ष २०७१ जुड शितल सिरुवा पर्ब के हार्दिक मंगलमय शुभकामना। बिक्रम्संबत के सुरवात राजा बिक्रम दितय के सम्यसे होते आरहा है। जुड-शितल त्योहार मिथिला ( हिन्दु ) का नया साल है जो कि १ वैशाख पर पड़ता है निशान. मिथिला क्षेत्र में भी भारत, वे अभी भी बिक्रम सम्बत कैलेंडर का पालन करने के लिए इस नए साल का जश्न मनाने. इस त्योहार के दौरान मैथिलि लोग जानकारीपूर्ण कार्यक्रमों के विभिन्न प्रकारों का आयोजन.करते है। 

 नव संवत् मुझे नव संचार भरे जग की नौसेना चांदनी; नव आशा के कलश सजाकर , मंगलमय करे संसार" आप सभी माहनुभाओ का आभिवादन नव वर्ष संवत २०७१ की हार्दिक बधाई नयाँ बर्ष २०७१ जुड शितल सिरुवा पर्ब के हार्दिक मंगलमय शुभकामना। बिक्रम्संबत के सुरवात राजा बिक्रम दितय के सम्यसे होते आरहा है। जुड-शितल त्योहार मिथिला ( हिन्दु ) का नया साल है जो कि १ वैशाख पर पड़ता है निशान. मिथिला क्षेत्र में भी भारत, वे अभी भी बिक्रम सम्बत कैलेंडर का पालन करने के लिए इस नए साल का जश्न मनाने. इस त्योहार के दौरान मैथिलि लोग जानकारीपूर्ण कार्यक्रमों के विभिन्न प्रकारों का आयोजन.करते है। 

 शब्द जुडशितल दो शब्दों से ली गई है: जो 'जमात' आशीर्वाद और इसका मतलब है 'शितल ' ठंडा मतलब है. मिथिला क्षेत्र बैशाख २ गते के महीने के बाद भीषण गर्मी का सामना इसलिए, इस त्योहार के लिए एक शांत वातावरण लाने के लिए मनाया जाता है. यह त्यौहार भी त्योहार सफाई और स्पष्टता के रूप में माना जाता है. लोगों के लिए अनिवार्य इस त्योहार के दौरान स्तु खाने के लिए है. इसी तरह, बडी झोड़ी और चिरैटो अन्य इस त्योहार में महत्वपूर्ण खाद्य वस्तुओं रहे हैं. हमारे वर्तमान संदर्भ में, हमारी संस्कृति और प्राकृतिक पर्यावरण के संरक्षण के पहलू पर, इस त्योहार महत्वपूर्ण माना जा सकता है.

नव बर्षमे बरसए हर्ष नित सुख शान्तिक ई नदी बहाबए । करए मनोरथ पूरा सभकेर जन–जनमे प्रित स्नेह जगाबए ।।

जुडशीतलक शीतलता सहेजिकऽ हमरासभक पहिचान नष्ट करबाक लेल अपने डारिपर उगल किछु बाँझीसभक अमरलत्तीपनकेँ लतियबैत अपन हरियरी कायम राखि सकी, इएह अछि नव वर्ष २०७१ क हार्दिक मङ्गलमय शुभकामना

नव वर्षक नव भोरमे, नव उमंगमे नव तरंगमे, अहाँक हृदय नव उत्सवसँ भरए, मनमे शान्ति, सफलता जिवनमे, नव स्वप्नसँ नयन सदति भरल रह………। नव वर्षक हार्दिक मंगलमय शुभकामना ।===

 नव वर्ष २०७१ क हार्दिक शुभकामना ।

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स्वजाति के सभी सदस्यों के लिए प्रकृति के कोने जो हमें बताता है सम्थिंग  से खुश नया साल, बधाई. २०७१ १  बैशाख  पर अपनी गतिविधियों से पर्यावरण बारिश हो रही, इसके रेक्नेउ  हवाओं मयाँथिंग  नष्ट कर. नष्ट के लिए गड़गड़ाहट का प्रतीक है. इसलिए है कि हम बहुत ध्यान से हमारे राष्ट्र के लिए जाना है, क्योंकि इस साल हमें दिखाने के लिए सुनहरा वर्ष है होना चाहिए कि उच्चतम लेने सगरमाथा एवं गौतम बुद्ध  .....................


" नव संवत्सर अर्थात नव वर्ष का अभिनन्दन !"

"क्रोध्ब्दे निखिला लोकाः क्रोध लोभ परायणाः|

इतिदोषेण सततं मध्य सस्यार्घ वृष्टयः|| 

आर्यावर्त की संस्कृति एवं संस्कार के अनुयायी ,समस्त मित्रवर ,नूतन संवत्सर ,[नववर्ष] के आगमन पर हम अभिनन्दन करते हैं , साथ ही -उन्नति ,प्रसन्नता की कामना भी ! राम - राम,नमस्कार , ||

 आंग्लभाषा [अंग्रेजी ] -का साल तो प्रारंभ हो चूका है ,सभी जानते हैं किन्तु हम अपनी ही संस्कृति से अनभिग्य होते जा रहे हैं | चैत्र मास की प्रतिपदा से नवसंवत्सर का प्रारंभ होता है -अंग्रेजी का -2014 और संस्कृत का संवत्सर -२०७१ है |

अस्तु -इस संवत्सर का रजा चन्द्र एवं मंत्री गुरु हैं जो मित्रता के प्रतीक हैं ,जब आपस में प्रेम होता है तो प्रसन्नता भी आती है |

[१]-संवत्सर का नाम -क्रोधी है -तो ये बात भी पक्की है की सभी क्रोधी स्वाभाव के सालभर रहेंगें ,और क्रोध का कारण लोभ होता है -हो सके तो हमलोग लोभ कम करेंगें तो क्रोध स्वतः ही समाप्त या कम हो जायेगा -जिससे हमारा विकास होगा ||

[२]-अन्न की स्थिति -टिड्डी ,कीटदोष,विषाक्त वायुमंडल -के कारण -अन्न ,खनिज पदार्थ कम उत्पन्न होंगें -क्योंकि इसके कारण भी हमहीं हैं -तो हो सके तो प्रकति के साथ चलें ||


[३]-वर्षा -जल के विना सब कुछ अधुरा रहेगा -परन्तु -वरुण देवता की यत्र -तत्र मामूली कृपा बनी रहेगी -अतः जल का भी सम्मान करें ||

[४]-वस्तु-हमारी आवश्यकताएं इतनी बढ़ गयीं हैं कि पूर्ति ही नहीं हो पातीं हैं -"अन्नात भवति पर्जन्नाया " जब अन्न कम होंगें [वस्तुएं कम होंगीं तो मंहगाई भी बधेंगीं ||


"देव युवा एकता" जिन्दाबाद। देव युवा सब एक जुट होऊ।

Wednesday, July 31, 2013

Morning Murli Om Shanti Bap Dada Madhuban View 31-07-2013@@ MURLI IN ENGLISH

卐!! ॐ नमः शिवाय!!卐!! !!卐!! शिव है धर्म का मूल सत्यम, शिवम और सुंदरम | शुभ प्रभात मित्रजनो...... जो व्यक्ति दुःख और सुख में हमारे साथ रहे वही हमारा वास्तविक हितैषी है... आपका दिवस मंगलमय हो.|ओम शान्ति |ओम शान्ति | ओम शान्ति | ओम शान्ति | ओम शान्ति | परमात्मा शिव. |.. ॐ नम शिवाय....ॐ नमः शिवाय! ॐ नमः शिवाय! ॐ नमः शिवाय....ॐ नम शिवाय...!

 ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ ­▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬●ஜ . . (¯*•๑۩۞۩: भोले की जय जय :۩۞۩๑•*¯).. . . (¯*•๑۩۞۩: शिव जी जय जय :۩۞۩๑•*¯).. काल हर !! कष्ट हर !! दुख हर !! दरिद्र हर !! हर हर महादेव !! ॐ नमः शिवाय......जय जय बाबा विश्वनाथ जी की. . (¯*•๑۩۞۩: पार्वती पति शिव जी जय जय :۩۞۩๑•*¯).. ஜ▬▬▬▬▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ ­▬▬▬▬▬▬▬▬▬▬●ஜ   
31 July 2013 Murli

View 31-07-2013@@ MURLI IN ENGLISH



 Morning Murli Om Shanti BapDada Madhuban  


English Murli

Essence: Sweet children, you have come to this spiritual university to change from buddhus (foolish ones) to wise. Wise means pure. You are now studying this study to become pure.
Question: What are the main signs of wise children?
Answer: Wise children constantly play with knowledge. They are always intoxicated in Godly intoxication. All the knowledge of the world cycle is in their intellects. They have the intoxication: Our Baba has come from the supreme abode for us and we resided with Him in the supreme abode. Our Baba is the Ocean of Knowledge and we have become master oceans of knowledge. He has come to give us the inheritance of liberation and liberation-in-life.
Song: Who has come to the door of my heart?
Essence for dharna:
1. Surrender everything with your intellect and live as a trustee. Perform every task with great caution according to shrimat.
2. Remember Baba and the inheritance and experience limitless happiness. While in remembrance of Baba, experience Godly intoxication. Become a true lover.
Blessing: May you be a carefree emperor who considers the self to be an instrument and performs every action with the awareness: “The One who is inspiring everyone is getting it done through me”.
“The One who makes everyone move is making me move, the One who is inspiring everyone is getting it done through me” Be an instrument with this awareness as you continue to perform actions and you will remain a carefree emperor. When you have the awareness that you are doing something, you cannot then remain a carefree emperor. However, the awareness that you have been made an instrument by the Father gives you the experience of a carefree and worry-free life. Then, there is no worry of what is going to happen tomorrow. Such a soul has the faith that whatever is happening is good and that whatever is going to happen will be even better because the One who is inspiring everyone is the best of all.

Slogan: Give everyone the experience of happiness and comfort through your vibrations of peace and happiness and only then will you be called a true server.


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Thursday, January 31, 2013

श्री बाबा पशुपति नाथ मधेश के जीला सप्तरी ग्राम विषहरिया


                                               ♥♥ ऊँ नम: शिवाय ♥ ऊँ नम: शिवाय ♥ऊँ नम: शिवाय ♥ऊँ नम: शिवाय ♥♥


 

                                                                                               



श्री बाबा पशुपति नाथ



कर्पूरगौरं करुणावतारं
संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम् ।
सदावसन्तं हृदयारविन्दे
भवं भवानीसहितं नमामि ॥.....



मधेश के महान गौरव कि बात है । मधेश के जीला सप्तरी ग्राम विषहरिया -8 अबस्थित श्री पशुपति नाथ जी के मन्दिर दिन प्रतिदिन जिर्ण होतेजारहा है । श्री पशुपति नाथ के मन्दिर स्वर्गीय श्री बिहारी लाल देव दुवारा नब निर्मित कियागाया था मन्दिर के पश्चिम गंगा शागर पोखर है । श्री पशुपति नाथ के मन्दिर के उतर मे श्री रामजानकी मन्दिर है । श्री राम जानकी मन्दिर से पुर्ब दिशा मे 200 मीटर कि दुरी मे विषहरिया ग्राम के ग्राम देवता कि मन्दिर भी है । ग्राम देव ता को श्री दिहबार बाबा के नाम से विषहरिया ग्राम बाषि पुजा पाठ करते है । विषहरिया मे ग्राम देवता कि स्थापना स्वर्गीय श्री बिहारी लाल देव दुवार हि किया गया है । और ये समस्त मन्दिर उन्ही कि निजि जमिन पे अबस्थित है । स्वर्गीय श्री बिहारी लाल देव सप्तरी जीला के हि जानी मणि हस्तिया थे । श्री बाबा पशुपति नाथ या श्री राम जानकी के नित्य बिधि पुर्बक पुजा पाठ भजन किर्तन संधिया आरती झाक्री भी होया करते थे । या समय समय मे यज्ञ हवन आज भी होते आराहे है । श्री बाबा पशुपति नाथ बिस्व काही दुश्रा है। श्री बाबा पशुपति नाथ के मुर्ति को डाकुवो ने चुरा के लेजाने के लिए 3 - 4 बार आगया लेकिन डाकुवो कि परयास सफल नही हुवा । एक बार तो डाकुवो ने श्री पशुपति नाथ के मुर्ति कि शिला फोड्ने लग पर शिला फुट नही पाया । तब जाके डाकुवो ने श्री बाबा पशुपति नाथ के मुर्ति कि हाथ के हिसे को तोड्के लेगाया,और मन्दिर के अन्य समान घटी सब चुराके लेगाया और मन्दिर के पुजारी श्री बाल ब्रहमचारी बाबा ज्ञानी दाश जी को निर्मन तरिके से मारपिट कि गई । गाउ बालो आनेपे सारे भाग गया । उसके बाद नेपाल सरकारके पुरातत्व बिभाग के अधिकारियो ने श्री बाबा पशुपति नाथ के मुर्ति को जाच पर्तल कर्ने के बाट ये बताया गया कि इस तरह के मुर्ति पुरा संसार मे सिर्फ 3 हि है ।श्री बाबा पशुपति नाथ के मुर्ति पहला काठमाडौँ । श्री बाबा पशुपति नाथ के मुर्ति दुशरा मधेश के जीला सप्तरी विषहरिया ग्राम-8 मे है । और श्री बाबा पशुपति नाथ के मुर्ति तिसरा भारत के बनारष मे है । मन्दिर के पुजारी श्री बाल ब्रहमचारी बाबा ज्ञानी दाश जी आज एकदम बृद्ध होगये है । स्वर्गीय श्री बिहारी लाल देव धार्मिक या समाजिक कार्य कर्म किया करते थे।सप्तरी जीला बाषि या  विषहरिया ग्राम के नागरि को का कहना है कि ये एक देव्य पुरुष महादेव काहि अंश है । ये सचे मन से जिस बस्तु को हात लग देते थे अनाज का भण्डार हो या अन्य कोइ चिज कभी घट ते नही थे कुछ भी चिज । स्वर्गीय श्री बिहारी लाल देव के एक पुत्र थे । स्वर्गीय श्री महाबिर लाल देव । स्वर्गीय श्री महाबिर लाल देव भी आप ने पिता कि तरह धार्मिक या समाजिक कम किया करते थे । इन होने हि अपने दरबाजे (दलान) पे बिद्यालय संचालन किए थे । और गुरु जानो को आपने हि दरबाजे (दलान) पे रख के  विषहरिया ग्राम मे शिक्षा के ज्योति फैलाए । और अन्त मे अपनी निज जमिन मे बिद्यालय खोल्के  श्री महाबिर माध्यमिक बिद्यालय विषहरिया सप्तरी मधेश मे स्थापना किए। और बिद्यालय के नाम 21 बिघाह जमिन जाय्दात कर्दिये है । इन्हो ने भी आपने जिबन कल मे सप्तरी जीला मे बहुत हि धर्मात्मिक काम किए है । मधेश सप्तरी जीला के गम्हरिया प्रबाह ग्राम को पछ बरिया विषहरिया  के नाम से हि जना जता है ।मे अपना खुद के जमिन मे मन्दिर पोखरी इनार बगिचे आदि बनाए और कामत बनाया । मधेश सप्तरी जीला के गम्हरिया प्रबाह कामत ( पछ बरिया विषहरिया)मे भी इन्हो ने बिभिन् यज्ञ हबन आदि कर्बये । इसी यज्ञ मे मेरा जनम भी हुवा था । स्वर्गीय श्री महाबिर लाल देव हमारे नना जी हुवे । स्वर्गीय श्री महाबिर लाल देव के 2 पुत्र या 6 पुत्रिया है । स्वर्गीय श्री महाबिर लाल देव के बडे पुत्र श्री बेद नारायण लाल देव आ कनिस्ट स्वर्गीय श्री शक्ति प्राषद देब है । मेरी माँ आपने भैयो बहन मे सब से कनिस्ट है । स्वर्गीय श्री महाबिर लाल देव के दरबाजे (दलान) पे हाथी , घोडो या गायो कि कोइ कमि नही थि । हाथी , घोडो या गायो कि तो 4-5 तबेला हि था ।एक स्वर्गीय श्री महाबिर लाल देव के दरबाजे (दलान) पे नेपाल के जानी मानी अञ्चल धिष या अन्य अने बिसिस्ट व्यक्ति भी आय जया करते थे । हमारे पिता जी के शादी मे नाना जी ( स्वर्गीय श्री महाबिर लाल देव ) ने हमारे दादा जी (स्वर्गीय श्री तेज नारायण लाल देव ) को हाथी दिए थे । तब से हमारे दादा जी का नाम हाथि-याह  कह के गौबलो या हमार देव स्वजाति मित्र -गण  बोलने लग गए है । और हमारे देव स्वजाति मे हि हाथी हमारे दादा जी या नाना जी के यहाँ था । ए तो गर्भ कि बाते आज हमे होराही है । हमारे पिता जी श्री भिम शंकर देव (प्रनाधयापक - हेडमास्टर ) नेपाल सरकार के सेवा मे थे ।  पिताजी नेपाल सरकार से अबकास प्राप्त हो गए है ।  मै 3 भाई हु । हमारे भाई दोनो मुझ से  छोटा हाई । और मै ये सोध कर्ता राजीव देव हु । मधेश  सप्तरी जीला के जानी मानी 3 हस्तिया थे । एक स्वर्गीय श्री महाबिर लाल देव । दुशरा स्वर्गीय श्री विन्देश्वरी शिंह । या तिसरा स्वर्गीय श्री विन्दे श्वरी यादव थे ये तिनो सप्तरी मधेश कि हस्तिया थे ।स्वर्गीय श्री विन्दे श्वरी यादव नेपाल के नि वर्तमान संसद या सभा सद श्रीमती रेणु यादव जी के सशुर है ।
मधेश के महान गौरब श्री पशुपति नाथ के मन्दिर दिन प्रतिदिन जिर्ण होते जाराहा है । नेपाल सरकार दुवारा संरकक्षण या जिर्ण पुन् निर्माण अति आबस्यक है ।  नेपाल सरकार के निजि गुठि,मठ ,मन्दिर ,गुरुदुवार मह्जिद येन अन्तर गत संरकक्षण कर्के एक पर्यटक स्थल बन के मधेश कि बिकाश होसकता है । सप्तरी मधेश के जीला सप्तरी मे अने क धार्मिक मन्दिर सब है । श्री पशुपति नाथ के मन्दिर , माँ छिन्मस्ता भगबती, माँ कन्कलनी मन्दिर ,माँ राजदेवी मन्दिर ,श्री हनुमान मन्दिर आ अन्य अनेक मन्दिर है । इसलिए मधेश के जीला सप्तरी को एक धार्मिक या पर्यटक  क्षेत्र  के रुप मे घोसित किया जाय .. 

जय बाबा श्री पशुपति नाथ कि  जय ...
श्री पशुपति नाथ समस्त मधेश या मधेशी कि  रक्षा करे ,,,,

श्री पशुपति नाथ जी को मेरा प्रणाम
राजीव देव
rajev10deo@gmail.com
00977-9851091556

Monday, December 31, 2012

नया साल मुबारक

♥♥ ऊँ नम: शिवाय ♥ ऊँ नम: शिवाय ♥ऊँ नम: शिवाय ♥ऊँ नम: शिवाय ♥♥


मेरे प्रिय समस्त देव, चौधरी, पौदार स्वजाति & मित्रगन आप सभी माहनुभाओ का आभिवादन नव वर्ष संवत 2013 की हार्दिक बधाई हैप्पी न्यू ईयर 2013

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˛. (´• ̮•)*˛°*/.♫.♫\*˛.* ˛_Π_____. * ˛*
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 27. मैं 2013 में इच्छा
भगवान तुम देता है ...
खुशी के 12 महीने,
मज़ा के 52 सप्ताह,
सफलता दिनों 365,
8760 अच्छे स्वास्थ्य के घंटे,
52600 गुड लक मिनट,
खुशी के 3153600 सेकण्ड ... और वह सब है!
 26. वर्षों n आना जाना है, लेकिन इस साल मैं विशेष रूप से स्वास्थ्य n के 4 UA डबल खुराक इच्छा सुख सौभाग्य के भार के साथ अव्वल रहा. एक gr8 वर्ष आगे है! नया साल मुबारक !!!!!

25. हो सकता है इस नए साल कई अवसरों अपना रास्ता ले, जीवन की हर खुशी का पता लगाने और दिनों के लिए अपने प्रस्तावों के आगे कर सकते हैं फर्म रहना है, वास्तविकता में सभी अपने सपने और महान उपलब्धियों में सभी अपने प्रयासों को बदल रहे हैं.


 24. रातों डार्क हैं, लेकिन दिन प्रकाश कर रहे हैं,
काश तुम्हारी जीवन हमेशा उज्ज्वल हो जाएगा.
तो मेरे प्रिय डर नहीं मिलता
Coz, भगवान ने हमें एक "नया साल" उपहार.

* * नया साल मुबारक
23. आप के लिए मेरी इच्छा, जनवरी, प्यार के लिए फ़रवरी, मार्च के लिए शांति, अप्रैल के लिए कोई चिंता नहीं, मज़ा मई के लिए, जोय के लिए जून के लिए महान नवम्बर, दिसम्बर के लिए खुशी शुरू करने के लिए, क्या एक भाग्यशाली और 2013 अद्भुत

22. मैं चाहता हूँ यू एक है ... ..
मधुर रविवार,
Marvellous सोमवार,
स्वादिष्ट मंगलवार,
बुधवार कमाल है,
आभारी गुरुवार,
दोस्ताना शुक्रवार,
सफल शनिवार.
एक महान वर्ष है. नया साल मुबारक



21. 'भगवान की यूनिवर्सल बैंक में ...
भगवान भंडार उनके आशीर्वाद और 365 दिनों के प्यार करता हूँ, और आप के लिए विश्वास खुशियों से भरा जमा ...
इसलिए, का आनंद लें खर्च ...
नया साल मुबारक हो.

20. एक सुकून की बात नहीं, एक शांतिपूर्ण आत्मा, गला खोलकर आत्मा, एक स्वस्थ और प्यार से भरा हुआ शरीर दिल .. ये सब मेरी प्रार्थना कर रहे हैं के लिए तुम .. एक हैप्पी न्यू इयर 2013 काश


19. भर में आगामी वर्ष के अपने जीवन के छोटे सुख उत्सव ... तुम एक उज्ज्वल, खुश और समृद्ध भगवान का आशीर्वाद के साथ नई 2013 वर्ष इच्छाओं से भरा जा सकता है.

18. सूरज इस साल में डूबता है, इससे पहले कि यादें पाती, इससे पहले कि नेटवर्क जाम हो ... .. काश यू और उर परिवार हैप्पी न्यू जगमगाती 2013 साल पहले ... ..

17. नया साल शुरू होता है, हम प्रार्थना करते हैं, कि यह नए शांति, नई खुशी, और नए दोस्त की बहुतायत के साथ एक साल हो जाएगा. भगवान ने तुम्हें नए वर्ष के माध्यम से बाहर भला करे.

16. आप नया साल मुबारक हो बधाई, मई हमेशा उर दिल में विशेष और नए साल की सुंदरता जयकार रखने यू.

15. नव वर्ष के लिए नए क्षितिज उधेड़ना और नए सपनों को साकार करने के लिए यू के भीतर शक्ति और विश्वास rediscover, करने के लिए 4 के लिए एक नई चुनौतियों साधारण सुख और गियर में आनन्द का समय है. Wishin वास्तव में एक 2013 पूरा करने यू

14. मध्य nite घंटी बजती है आज रात को जब ...
इसे आप के लिए नए और बेहतर चीजें दर्शाता है,
यह सब बातें तुम जाने के लिए इच्छा के एक अहसास है दर्शाता है,
चलो यह साहस की एक वर्ष दर्शाता है और उनका मानना ​​है,
तुम एक बहुत ... बहुत ... बहुत 2013 prosperious बधाई

13. नव वर्ष दिवस: अब स्वीकार करने के लिए अपने नियमित रूप से वार्षिक अच्छा संकल्प करना है. अगले हफ्ते तुम उनके साथ नरक पक्की सड़क के रूप में हमेशा की तरह शुरू कर सकते हैं.

12. लोग तो क्या वे क्रिसमस और नव वर्ष के बीच खाने के बारे में चिंतित हैं, लेकिन वे वास्तव में वे क्या नए साल और क्रिसमस के बीच खाने के बारे में चिंतित होना चाहिए. नया साल मुबारक हो! 12. थोड़ा बड़ा चाबी ताले खुले
सरल शब्दों महान विचारों को प्रतिबिंबित
तुम्हारी मुस्कान दिल ब्लॉक इलाज कर सकते हैं
तो यह चट्टानों मुस्कुराते रहते हैं.
हैप्पी न्यू इयर 2013

11. 2013 द्वार पर है ...
याद
जिंदगी छोटी है, नियमों को तोड़ने,
जल्दी से माफ कर दो,
सच में प्यार,
uncontrollably हँसते हैं,
और
कुछ भी किया है कि तुम मुस्कान अफसोस कभी नहीं.

10. Thre 2013 में कई बार किया गया है
मैं जब तुम परेशान हो सकता है
परेशान यू
चिढ़ यू
bugged यू
.
.
.
.
आज मैं सिर्फ तुम्हें बताना चाहता हूँ
.
.
.
.
मैं इसे 2013 में जारी रखने की योजना है.

9. मैं चाहता हूँ यू एक है ... ..
मधुर रविवार,
Marvellous सोमवार,
स्वादिष्ट मंगलवार,
बुधवार कमाल है,
आभारी गुरुवार,
दोस्ताना शुक्रवार,
सफल शनिवार.
एक महान वर्ष है. नया साल मुबारक

8. हम किताब खोल देगा.
इसके पन्नों में रिक्त हैं.
हम उन्हें अपने आप पर शब्दों डाल करने जा रहे हैं.
किताब के मौके भी कहा जाता है
और
इसके प्रथम अध्याय नव वर्ष दिवस है.

7. रातों डार्क हैं, लेकिन दिन प्रकाश कर रहे हैं,
काश तुम्हारी जीवन हमेशा उज्ज्वल हो जाएगा.
तो मेरे प्रिय डर नहीं मिलता
Coz, भगवान ने हमें एक "नया साल" उपहार.
* * नया साल मुबारक

6. पहले सूर्य इस वर्ष में सेट,
यादों फीका से पहले,
पहले शुद्ध काम करता जाम मिलता है
काश यू और उर परिवार खुश जगमगाती न्यू इयर 2013

5. एक दिन में हर पल का अपना महत्व है.
सुबह आशा लाता है,
दोपहर आस्था लाता है,
शाम प्यार लाता है,
रात बाकी लाता है,
आप उन सभी को हर रोज़ होगा आशा है.
नव वर्ष 2013

4. जब मध्य nite घंटी बजती है आज रात ..
इसे आप के लिए नए और बेहतर चीजें दर्शाता है,
यह सब बातें तुम जाने के लिए इच्छा के एक अहसास है दर्शाता है,
चलो यह साहस की एक वर्ष दर्शाता है और उनका मानना ​​है,
तुम एक बहुत ... बहुत ... बहुत समृद्ध 2013 बधाई

3. मुस्कान रखें,
छुट्टी आंसू,
आनन्द के बारे में सोचो,
भय भूल जाते हैं,
हंसी पकड़ो,
दर्द को छोड़,
खुशी हो,
अपने नए साल Coz!
नया साल मुबारक

2. टॉम क्रूज
एंजेलीना जोली
ऐश्वर्या राय
सलमान खान राजेश hamalJennifer लोपेज
अमिताभ बच्चन
मुझे और ..
सभी सितारे इच्छा एक बहुत नया साल मुबारक यू.

1. सुंदरता ..
ताजगी ..
सपने ..
सच ..
कल्पना ..
लग रहा है ..
विश्वास ..
ट्रस्ट ..
इस नए साल की शुरुआत है!

Monday, October 15, 2012

नवरात्री दुर्गा के नव रूप – नवरात्र-दुर्गापूजा

 हमारे समस्त मित्रगन और स्वजाति को बिजया दशमी के उपलक्ष में हार्दिक मंगलमय शुभकामान है |  आपलोग के  स्वस्थ दीर्घ आयु और उन्ती परगति  और ढेर सारे खुसिया आप की जीबन में आये | माँ दुर्गा भबानी आपलोगों की मनो कामना पूर्ण करे ... जय माँ  दुर्गा भबानी आप के चरणों में सादर परनाम .. प्रेमसे बोलो दुर्गा माता की जय .....  


During the festival of Navratri, Goddess Durga Devi is worshiped in nine avatars. During these nine holy days, each day of goddess Durga Mata is worshiped in different avatara.

First day of Navratri – Kalasha Sthapana (Kalasha Pooja) or Ghata Sthapana – Shailaputri Puja
Second day of Navratri – Preeti Dwitiya – Brahmacharini Puja
Third day of Navaratri – Chandrakanta pooja or Chandraghanta puja
Fourth day of Navaratri – Kushmanda pooja
Fifth day of Navratri – Skandamata Puja – Lalitha Panchami
Sixth day of Navratri – Katyayani Puja – Maha Shashti or Durga Shashti
Seventh day of Navratri – Kaalratri Pooja – Durga Saptami or Maha Sapthami
Eighth day of Navaratri – Maha Gauri Pooja – (Durgashtami Puja/Maha Ashtami/Veerashtami)
Ninth day of Navaratri – Siddhidatri Puja – (Mahanavami/Maharnavami or Durga Navami)
Tenth day of Navratri – Aparajitha Puja or Shami Pooja – Vijaya Dashami or Dasara


NAVARATRI PUJA PROCESS- DAY 1 TO DAY 9 IN HINDU

नवरात्रि का त्योहार नौ दिनों तक चलता है। इन नौ दिनों में तीन देवियों पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ स्वरुपों की पूजा की जाती है। पहले तीन दिन पार्वती के तीन स्वरुपों (कुमार, पार्वती और काली), अगले तीन दिन लक्ष्मी माता के स्वरुपों और आखिरी के तीन दिन सरस्वती माता के स्वरुपों की पूजा करते हैं।

वासन्तिक नवरात्रि के नौ दिनों में आदिशक्ति माता दुर्गा के उन नौ रूपों का भी पूजन किया जाता है। माता के इन नौ रूपों को नवदुर्गा के नाम से भी जाना जाता है। नवरात्रि के इन्हीं नौ दिनों पर मां दुर्गा के जिन नौ रूपों का पूजन किया जाता है वे हैं – पहला शैलपुत्री, दूसरा ब्रह्माचारिणी, तीसरा चन्द्रघन्टा, चौथा कूष्माण्डा, पाँचवा स्कन्द माता, छठा कात्यायिनी, सातवाँ कालरात्रि, आठवाँ महागौरी, नौवां सिद्धिदात्री।

प्रथम दुर्गा : श्री शैलपुत्री

Mata Shailputri – First Avatara of Durga :

Mata Shailputri is a daughter of ‘Parvata raju’ (mountain king) – Himalaya / Himvanth. She is the first among nine avatars of Durga and worshiped on the First day of Navaratri . In her previous birth, she was ‘Sati Bhavani Mata’, the daughter of King Daksha. Mata Shailputri, also known as Parvati got married with Lord Shiva. On the first day of Durga Navratri, Paravathi Devi she is worshipped. Mata Shailputri holds a ‘Trishul’, a weapon, in her right hand and a lotus in her left hand. She rides on bull. She has pleasant smile and blissful looks.

नवरात्री प्रथम दिन माता शैलपुत्री की पूजा विधि

वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्द्वकृत शेखराम।
वृषारूढ़ा शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम॥

श्री दुर्गा का प्रथम रूप श्री शैलपुत्री हैं। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण ये शैलपुत्री कहलाती हैं। नवरात्र के प्रथम दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। गिरिराज हिमालय की पुत्री होने के कारण भगवती का प्रथम स्वरूप शैलपुत्री का है, जिनकी आराधना से प्राणी सभी मनोवांछित फल प्राप्त कर लेता है।

द्वितीय दुर्गा : श्री ब्रह्मचारिणी

Mata Brahmacharini – Second Avatara of Durga :

Mata Brahmacharini is worshipped on second day of Navarathri. Brahmacharini is the goddess who performed ‘Tapa’ (penance) (Brahma – Tapa , Charini - Performer ). Mata personifies love and loyalty. She holds japa mala in her right hand and Kamandal in left hand. She is also called as ‘Uma’ and ‘Tapacharini’ and provides knowledge and wisdom to her devotees.


नवरात्री दूसरा दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि

“दधना कर पद्याभ्यांक्षमाला कमण्डलम।
देवी प्रसीदमयी ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥“

श्री दुर्गा का द्वितीय रूप श्री ब्रह्मचारिणी हैं। यहां ब्रह्मचारिणी का तात्पर्य तपश्चारिणी है। इन्होंने भगवान शंकर को पति रूप से प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। अतः ये तपश्चारिणी और ब्रह्मचारिणी के नाम से विख्यात हैं। नवरात्रि के द्वितीय दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है।

जो दोनो कर-कमलो मे अक्षमाला एवं कमंडल धारण करती है। वे सर्वश्रेष्ठ माँ भगवती ब्रह्मचारिणी मुझसे पर अति प्रसन्न हों। माँ ब्रह्मचारिणी सदैव अपने भक्तो पर कृपादृष्टि रखती है एवं सम्पूर्ण कष्ट दूर करके अभीष्ट कामनाओ की पूर्ति करती है।

तृतीय दुर्गा : श्री चंद्रघंटा

Mata Chandraghanta – Third Durga :

Mata Chadraghanta is worshipped on the thrid day of Navratri. She is very bright and charming. Durga Maa is astride a tiger, displays a golden hue to HER skin, possesses ten hands and 3 eyes. Eight of HER hands display weapons while the remaining two are respectively in the mudras of gestures of boon giving and stopping harm. Chandra + Ghanta, meaning supreme bliss and knowledge, showering peace and serenity, like cool breeze in a moonlit night.


नवरात्री तीसरा दिन माता चंद्रघंटा की पूजा विधि

“पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैयुता।
प्रसादं तनुते मद्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥“

श्री दुर्गा का तृतीय रूप श्री चंद्रघंटा है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। नवरात्रि के तृतीय दिन इनका पूजन और अर्चना किया जाता है। इनके पूजन से साधक को मणिपुर चक्र के जाग्रत होने वाली सिद्धियां स्वतः प्राप्त हो जाती हैं तथा सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।

इनकी आराधना से मनुष्य के हृदय से अहंकार का नाश होता है तथा वह असीम शांति की प्राप्ति कर प्रसन्न होता है। माँ चन्द्रघण्टा मंगलदायनी है तथा भक्तों को निरोग रखकर उन्हें वैभव तथा ऐश्वर्य प्रदान करती है। उनके घंटो मे अपूर्व शीतलता का वास है।

चतुर्थ दुर्गा : श्री कूष्मांडा



Mata Kushmanda – Fourth Durga :

Mata Kushmanda is worshipped on the fourth day of Navrathri. . She shines brightly with a laughing face in all ten directions as the Sun. She controls whole Solar system. In her eight hands, she holds several types of weapons in six hands and a rosary and a lotus in remaining hands. She rides on Lion. She likes offerings of ‘Kumhde’, hence her name ‘Kushmanda’ has become popular.


नवरात्री चौथे दिन माता कूष्माण्डा की पूजा विधि
”सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च।
दधानाहस्तपद्याभ्यां कुष्माण्डा शुभदास्तु में॥“

श्री दुर्गा का चतुर्थ रूप श्री कूष्मांडा हैं। अपने उदर से अंड अर्थात् ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्मांडा देवी के नाम से पुकारा जाता है। नवरात्रि के चतुर्थ दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। श्री कूष्मांडा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक नष्ट हो जाते हैं।

इनकी आराधना से मनुष्य त्रिविध ताप से मुक्त होता है। माँ कुष्माण्डा सदैव अपने भक्तों पर कृपा दृष्टि रखती है। इनकी पूजा आराधना से हृदय को शांति एवं लक्ष्मी की प्राप्ति होती हैं।

पंचम दुर्गा : श्री स्कंदमाता


Ma Skanda Mata – Fifth Durga :

Skanda Mata is worshipped on the fifth Day of Navratri. She had a son ‘Skandaa and holds him on her lap . She has three eyes and four hands; two hands hold lotuses while the other 2 hands respectively display defending and granting gestures. Its said, by the mercy of Skandmata, even the idiot becomes an ocean of knowledge. The great and legendary Sanskrit Scholar Kalidas created his two masterpieces works “Raghuvansh Maha Kavya” and “Meghdoot” by the grace of Skandmata. Mata is considered as a deity of fire. She rides on Lion.

नवरात्री पंचमी दिन स्कंदमाता की पूजा विधि
“सिंहासनगता नित्यं पद्याञ्चितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥“

श्री दुर्गा का पंचम रूप श्री स्कंदमाता हैं। श्री स्कंद (कुमार कार्तिकेय) की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। नवरात्रि के पंचम दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। इनकी आराधना से विशुद्ध चक्र के जाग्रत होने वाली सिद्धियां स्वतः प्राप्त हो जाती हैं।

इनकी आराधना से मनुष्य सुख-शांति की प्राप्ति करता है। सिह के आसन पर विराजमान तथा कमल के पुष्प से सुशोभित दो हाथो वाली यशस्विनी देवी स्कन्दमाता शुभदायिनी है।

षष्ठम दुर्गा : श्री कात्यायनी

Mata Katyayani – Sixth Durga :

Mata Katyayani is worshippedon the the Sixth Day of Navratri. Rishi Katyayan observed a penance to get Jaganmata as his daughter. She blessed him and took birth as his daughter on the bank of river Jamuna for getting Lord Krishna as a husband. She is considered as prime deity of Vraj mandal. Ma Katyayani has three eyes and four hands. . One left hand holds a weapon and the other a lotus She rides on Lion.

नवरात्री पूजा - छठे दिन माता कात्यायनी की पूजा विधि

“चन्द्रहासोज्जवलकरा शार्दूलावरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्यादेवी दानव घातिनी॥“

श्री दुर्गा का षष्ठम् रूप श्री कात्यायनी। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इसलिए वे कात्यायनी कहलाती हैं। नवरात्रि के षष्ठम दिन इनकी पूजा और आराधना होती है।

इनकी आराधना से भक्त का हर काम सरल एवं सुगम होता है। चन्द्रहास नामक तलवार के प्रभाव से जिनका हाथ चमक रहा है, श्रेष्ठ सिंह जिसका वाहन है, ऐसी असुर संहारकारिणी देवी कात्यायनी कल्यान करें।




सप्तम दुर्गा : श्री कालरात्रि

Mata Kalratri – Seventh Durga :

Mata Kalaratri is worshipped on the Seventh Day of Navratri . She is dark and black like night, hence she is called as ‘Kalratri’. Her hairs are unlocked and has three eyes and four hands.while the remaining 2 are in the mudras of “giving” and “protecting”. HER vahana is a faithful donkey. The destroyer of darkness and ignorance. She spills out fire from her nostrils. She holds a sharp Sword in her right hand and blesses her devotees with her lower hand. As she blesses her devotees with prosperity, she is also called as ‘Shubhamkari’.


नवरात्री पूजा - सप्तमी दिन माता कालरात्रि की पूजा विधि
“एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा।
वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥“

श्रीदुर्गा का सप्तम रूप श्री कालरात्रि हैं। ये काल का नाश करने वाली हैं, इसलिए कालरात्रि कहलाती हैं। नवरात्रि के सप्तम दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है। इस दिन साधक को अपना चित्त भानु चक्र (मध्य ललाट) में स्थिर कर साधना करनी चाहिए।

संसार में कालो का नाश करने वाली देवी ‘कालरात्री’ ही है। भक्तों द्वारा इनकी पूजा के उपरांत उसके सभी दु:ख, संताप भगवती हर लेती है। दुश्मनों का नाश करती है तथा मनोवांछित फल प्रदान कर उपासक को संतुष्ट करती हैं।

अष्टम दुर्गा : श्री महागौरी


Mata Maha Gauri – Eighth Durga :

Mata Maha Gowri is worshipped on the Eight Day of Navratri. Maha Gauri looks as white as moon and jasmine. She has three Eyes and four hands. Peace and compassion radiate from HER being and SHE is often dressed in a white or green sari. SHE holds a drum and a trident and is often depicted riding a bull . Her above left hand is in fearless pose and she holds ‘Trishul’ in her lower left hand. Her above right hand has tambourine and lower right hand is in blessing mudra.

नवरात्री की अष्टमी दिन माता महागौरी की पूजा विधि
“श्वेत वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बर धरा शुचि:।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥“

श्री दुर्गा का अष्टम रूप श्री महागौरी हैं। इनका वर्ण पूर्णतः गौर है, इसलिए ये महागौरी कहलाती हैं। नवरात्रि के अष्टम दिन इनका पूजन किया जाता है। इनकी उपासना से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।

माँ महागौरी की आराधना से किसी प्रकार के रूप और मनोवांछित फल प्राप्त किया जा सकता है। उजले वस्त्र धारण किये हुए महादेव को आनंद देवे वाली शुद्धता मूर्ती देवी महागौरी मंगलदायिनी हों।

नवम् दुर्गा : श्री सिद्धिदात्री




Mata Siddhidatri – Ninth Durga :

Mata Siddhidatri is the worshipped on the Ninth Day of Navratri. Maha Shakti gives all the eight siddhis – Anima, Mahima, Garima, Laghima, Prapti, Prakamya, Iishitva and Vashitva. According to ‘Devi Puran’, the supreme God Shiva got all these siddhis by worshipping the supreme Goddess Maha Shakti. With her gratitude, his half body has become of Goddess, hence Lord Shiva’s name ‘Ardhanarishvar’ has become famous. According to some sources she drives on Lion. Other sources say, she is seated on lotus. Siddhidatri Devi is worshipped by all Gods, Rushis, Muniswaras, Siddha yogis, and all common devotees who want to attain the religious asset.


नवरात्री पूजा की नवमी दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा विधि

“सिद्धगंधर्वयक्षादौर सुरैरमरै रवि।
सेव्यमाना सदाभूयात सिद्धिदा सिद्धिदायनी॥“

श्री दुर्गा का नवम् रूप श्री सिद्धिदात्री हैं। ये सब प्रकार की सिद्धियों की दाता हैं, इसीलिए ये सिद्धिदात्री कहलाती हैं। नवरात्रि के नवम दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है।

सिद्धिदात्री की कृपा से मनुष्य सभी प्रकार की सिद्धिया प्राप्त कर मोक्ष पाने मे सफल होता है। मार्कण्डेयपुराण में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व एवं वशित्वये आठ सिद्धियाँ बतलायी गयी है। भगवती सिद्धिदात्री उपरोक्त संपूर्ण सिद्धियाँ अपने उपासको को प्रदान करती है। माँ दुर्गा के इस अंतिम स्वरूप की आराधना के साथ ही नवरात्र के अनुष्ठान का समापन हो जाता है।

इस दिन को रामनवमी भी कहा जाता है और शारदीय नवरात्रि के अगले दिन अर्थात दसवें दिन को रावण पर राम की विजय के रूप में मनाया जाता है। दशम् तिथि को बुराई पर अच्छाकई की विजय का प्रतीक माना जाने वाला त्योतहार विजया दशमी यानि दशहरा मनाया जाता है। इस दिन रावण, कुम्भकरण और मेघनाथ के पुतले जलाये जाते हैं।
नवरात्रि का त्योहार नौ दिनों तक चलता है। इन नौ दिनों में तीन देवियों पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ स्वरुपों की पूजा की जाती है। पहले तीन दिन पार्वती के तीन स्वरुपों (कुमार, पार्वती और काली), अगले तीन दिन लक्ष्मी माता के स्वरुपों और आखिरी के तीन दिन सरस्वती माता के स्वरुपों की पूजा करते हैं।

वासन्तिक नवरात्रि के नौ दिनों में आदिशक्ति माता दुर्गा के उन नौ रूपों का भी पूजन किया जाता है। माता के इन नौ रूपों को नवदुर्गा के नाम से भी जाना जाता है। नवरात्रि के इन्हीं नौ दिनों पर मां दुर्गा के जिन नौ रूपों का पूजन किया जाता है वे हैं – पहला शैलपुत्री, दूसरा ब्रह्माचारिणी, तीसरा चन्द्रघन्टा, चौथा कूष्माण्डा, पाँचवा स्कन्द माता, छठा कात्यायिनी, सातवाँ कालरात्रि, आठवाँ महागौरी, नौवां सिद्धिदात्री।
प्रथम दुर्गा : श्री शैलपुत्री

नवरात्री प्रथम दिन माता शैलपुत्री की पूजा विधि

वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्द्वकृत शेखराम।
वृषारूढ़ा शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम॥

श्री दुर्गा का प्रथम रूप श्री शैलपुत्री हैं। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण ये शैलपुत्री कहलाती हैं। नवरात्र के प्रथम दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। गिरिराज हिमालय की पुत्री होने के कारण भगवती का प्रथम स्वरूप शैलपुत्री का है, जिनकी आराधना से प्राणी सभी मनोवांछित फल प्राप्त कर लेता है।
द्वितीय दुर्गा : श्री ब्रह्मचारिणी

नवरात्री दूसरा दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि

“दधना कर पद्याभ्यांक्षमाला कमण्डलम।
देवी प्रसीदमयी ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥“

श्री दुर्गा का द्वितीय रूप श्री ब्रह्मचारिणी हैं। यहां ब्रह्मचारिणी का तात्पर्य तपश्चारिणी है। इन्होंने भगवान शंकर को पति रूप से प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। अतः ये तपश्चारिणी और ब्रह्मचारिणी के नाम से विख्यात हैं। नवरात्रि के द्वितीय दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है।

जो दोनो कर-कमलो मे अक्षमाला एवं कमंडल धारण करती है। वे सर्वश्रेष्ठ माँ भगवती ब्रह्मचारिणी मुझसे पर अति प्रसन्न हों। माँ ब्रह्मचारिणी सदैव अपने भक्तो पर कृपादृष्टि रखती है एवं सम्पूर्ण कष्ट दूर करके अभीष्ट कामनाओ की पूर्ति करती है।
तृतीय दुर्गा : श्री चंद्रघंटा

नवरात्री तीसरा दिन माता चंद्रघंटा की पूजा विधि

“पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैयुता।
प्रसादं तनुते मद्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥“

श्री दुर्गा का तृतीय रूप श्री चंद्रघंटा है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। नवरात्रि के तृतीय दिन इनका पूजन और अर्चना किया जाता है। इनके पूजन से साधक को मणिपुर चक्र के जाग्रत होने वाली सिद्धियां स्वतः प्राप्त हो जाती हैं तथा सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।

इनकी आराधना से मनुष्य के हृदय से अहंकार का नाश होता है तथा वह असीम शांति की प्राप्ति कर प्रसन्न होता है। माँ चन्द्रघण्टा मंगलदायनी है तथा भक्तों को निरोग रखकर उन्हें वैभव तथा ऐश्वर्य प्रदान करती है। उनके घंटो मे अपूर्व शीतलता का वास है।
चतुर्थ दुर्गा : श्री कूष्मांडा

नवरात्री चौथे दिन माता कूष्माण्डा की पूजा विधि

”सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च।
दधानाहस्तपद्याभ्यां कुष्माण्डा शुभदास्तु में॥“

श्री दुर्गा का चतुर्थ रूप श्री कूष्मांडा हैं। अपने उदर से अंड अर्थात् ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्मांडा देवी के नाम से पुकारा जाता है। नवरात्रि के चतुर्थ दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। श्री कूष्मांडा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक नष्ट हो जाते हैं।

इनकी आराधना से मनुष्य त्रिविध ताप से मुक्त होता है। माँ कुष्माण्डा सदैव अपने भक्तों पर कृपा दृष्टि रखती है। इनकी पूजा आराधना से हृदय को शांति एवं लक्ष्मी की प्राप्ति होती हैं।
पंचम दुर्गा : श्री स्कंदमाता

नवरात्री पंचमी दिन स्कंदमाता की पूजा विधि

“सिंहासनगता नित्यं पद्याञ्चितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥“

श्री दुर्गा का पंचम रूप श्री स्कंदमाता हैं। श्री स्कंद (कुमार कार्तिकेय) की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। नवरात्रि के पंचम दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। इनकी आराधना से विशुद्ध चक्र के जाग्रत होने वाली सिद्धियां स्वतः प्राप्त हो जाती हैं।

इनकी आराधना से मनुष्य सुख-शांति की प्राप्ति करता है। सिह के आसन पर विराजमान तथा कमल के पुष्प से सुशोभित दो हाथो वाली यशस्विनी देवी स्कन्दमाता शुभदायिनी है।
षष्ठम दुर्गा : श्री कात्यायनी

नवरात्री पूजा - छठे दिन माता कात्यायनी की पूजा विधि

“चन्द्रहासोज्जवलकरा शार्दूलावरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्यादेवी दानव घातिनी॥“

श्री दुर्गा का षष्ठम् रूप श्री कात्यायनी। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इसलिए वे कात्यायनी कहलाती हैं। नवरात्रि के षष्ठम दिन इनकी पूजा और आराधना होती है।

इनकी आराधना से भक्त का हर काम सरल एवं सुगम होता है। चन्द्रहास नामक तलवार के प्रभाव से जिनका हाथ चमक रहा है, श्रेष्ठ सिंह जिसका वाहन है, ऐसी असुर संहारकारिणी देवी कात्यायनी कल्यान करें।
सप्तम दुर्गा : श्री कालरात्रि

नवरात्री पूजा - सप्तमी दिन माता कालरात्रि की पूजा विधि

“एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा।
वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥“

श्रीदुर्गा का सप्तम रूप श्री कालरात्रि हैं। ये काल का नाश करने वाली हैं, इसलिए कालरात्रि कहलाती हैं। नवरात्रि के सप्तम दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है। इस दिन साधक को अपना चित्त भानु चक्र (मध्य ललाट) में स्थिर कर साधना करनी चाहिए।

संसार में कालो का नाश करने वाली देवी ‘कालरात्री’ ही है। भक्तों द्वारा इनकी पूजा के उपरांत उसके सभी दु:ख, संताप भगवती हर लेती है। दुश्मनों का नाश करती है तथा मनोवांछित फल प्रदान कर उपासक को संतुष्ट करती हैं।
अष्टम दुर्गा : श्री महागौरी

नवरात्री की अष्टमी दिन माता महागौरी की पूजा विधि

“श्वेत वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बर धरा शुचि:।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥“

श्री दुर्गा का अष्टम रूप श्री महागौरी हैं। इनका वर्ण पूर्णतः गौर है, इसलिए ये महागौरी कहलाती हैं। नवरात्रि के अष्टम दिन इनका पूजन किया जाता है। इनकी उपासना से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।

माँ महागौरी की आराधना से किसी प्रकार के रूप और मनोवांछित फल प्राप्त किया जा सकता है। उजले वस्त्र धारण किये हुए महादेव को आनंद देवे वाली शुद्धता मूर्ती देवी महागौरी मंगलदायिनी हों।
नवम् दुर्गा : श्री सिद्धिदात्री

नवरात्री पूजा की नवमी दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा विधि

“सिद्धगंधर्वयक्षादौर सुरैरमरै रवि।
सेव्यमाना सदाभूयात सिद्धिदा सिद्धिदायनी॥“

श्री दुर्गा का नवम् रूप श्री सिद्धिदात्री हैं। ये सब प्रकार की सिद्धियों की दाता हैं, इसीलिए ये सिद्धिदात्री कहलाती हैं। नवरात्रि के नवम दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है।

सिद्धिदात्री की कृपा से मनुष्य सभी प्रकार की सिद्धिया प्राप्त कर मोक्ष पाने मे सफल होता है। मार्कण्डेयपुराण में अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व एवं वशित्वये आठ सिद्धियाँ बतलायी गयी है। भगवती सिद्धिदात्री उपरोक्त संपूर्ण सिद्धियाँ अपने उपासको को प्रदान करती है। माँ दुर्गा के इस अंतिम स्वरूप की आराधना के साथ ही नवरात्र के अनुष्ठान का समापन हो जाता है।

इस दिन को रामनवमी भी कहा जाता है और शारदीय नवरात्रि के अगले दिन अर्थात दसवें दिन को रावण पर राम की विजय के रूप में मनाया जाता है। दशम् तिथि को बुराई पर अच्छाकई की विजय का प्रतीक माना जाने वाला त्योतहार विजया दशमी यानि दशहरा मनाया जाता है। इस दिन रावण, कुम्भकरण और मेघनाथ के पुतले जलाये जाते हैं।

Sunday, October 14, 2012

मैथिल देव (दिज) जातिक इतिहास आ संस्कृति

समस्त देव जाती के लिए एक खुसिकी खबर है | देव जातिके बारेमे सदियों से बिसेस खोज निति और अनुसन्धान करने के बाद श्री राम नारायण देव ( पत्रकार ,अधिबकता ) जी ने देव जाती के लिए एक बिसेस पुस्तक प्रकाशन किये हुए है |  पुस्तक का नाम है | मैथिल देव (दिज) जातिक इतिहास आ संस्कृति |श्री राम नारायण देव ( पत्रकार ,अधिबकता ) जी दुवारा लिखा गया पुस्तक सर्ब प्रथम मैथिल देव जातिके इतिहास,रहन-सहन,रिति रिबाज,भाषा,संस्कृति और अन्य देव जाती के बिषय बस्तुको समाबेश करके देव जाती का पुस्तक बहुतही जल्द बजार में उपलब्ध होने जा रहा है |  पुस्तक का नाम है | मैथिल देव (दिज) जातिक इतिहास आ संस्कृति | श्री राम नारायण देव ( पत्रकार ,अधिबकता ) जी के  मधेश बिभिन जात जाती , मधेश के समस्या के बारेमे भी बिभिन पत्र पत्रिका में लेख सब आते रहते है.. | और बहुतही समाजसेबी भी है |||