गुप्त राजवंश या गुप्त वंश प्राचीन भारत के प्रमुख राजवंशों में से एक था। इसे भारत का एक स्वर्ण युग माना जाता है।
मौर्य वंश के पतन के बाद दीर्घकाल तक भारत में राजनीतिक एकता स्थापित नहीं रही। कुषाण एवं सातवाहनों ने राजनीतिक एकता लाने का प्रयास किया। मौर्योत्तर काल के उपरान्त तीसरी शताब्दी इ. में तीन राजवंशो का उदय हुआ जिसमें मध्य भारत में नाग शक्ति, दक्षिण में बाकाटक तथा पूर्वी में गुप्त वंश प्रमुख हैं। मौर्य वंश के पतन के पश्चात नष्ट हुई राजनीतिक एकता को पुनस्थापित करने का श्रेय गुप्त वंश को है।
गुप्त साम्राज्य की नींव तीसरी शताब्दी के चौथे दशक में तथा उत्थान चौथी शताब्दी की शुरुआत में हुआ। गुप्त वंश का प्रारम्भिक राज्य आधुनिक उत्तर प्रदेश और बिहार में था।
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International Dev Sewa Samiti ' अन्तरराष्ट्रिय देव सेवा समिति "
देव समुदाय पुर्बी मधेश तराई नेपाल के बिषिस्ट एतिहासिक संस्कृतिक पहिचान भेल एक जाति अछ .|
समस्त देव, चौधरी & पौदार स्वजाति लोक्नीसब से बिनम्र अन्नुरोध अछ | जे कृपिया समस्त देव जाति अस्तितव के सवाल अछ
राष्ट्रिय अन्तरराष्ट्रिय रुप मे देव जाति के पहिचान कारवा के राष्ट्रिय मुलधार मे जातीय पहिचान स्पस्ट कर्वाक उदेस्य से संस्था दर्ता एन अन्तर्गत दर्ता कर्वाक ले अतिआबसयक अछ.| समस्त देव जाति के साझा संस्था हि International Dev Sewa Samiti ' अन्तरराष्ट्रिय देव सेवा समिति " छि. | समस्त देव, चौधरी & पौदार स्वजाति लोक्नीसब से बिनम्र अन्नुरोध अछ | जे कृपिया समस्त देव जाति अस्तितव के सवाल अछ | हम आहा देव जातिके अस्तितव बचाबाईले चहाही छि कि नै.. यदी जातिके अस्तितव नै रहत ते हमार अहाके अस्तितव कतेसे रहत.. तही हेतु कृपिया समस्त स्वजाति लोग्नी अखण के जे सबाल अछ तैके ले हमर अहाके जातीय अस्तितव के सबाल अछ .हम अहाके एक जुट होइके परत |