विक्रम संवत के सुरवात राजा विक्रमादित्य के सम्यसे होते आरहा है।
भारत और नेपाल की हिंदू परंपरा में व्यापक रूप से प्रयुक्त प्राचीन पंचाग हैं विक्रम संवत् या विक्रम युग. कहा जाता है कि ईसा पूर्व 56 में शकों पर अपनी जीत के बाद राजा ने इसकी शुरूआत की थी.
भारत और नेपाल की हिंदू परंपरा में व्यापक रूप से प्रयुक्त प्राचीन पंचाग हैं विक्रम संवत् या विक्रम युग. कहा जाता है कि ईसा पूर्व 56 में शकों पर अपनी जीत के बाद राजा ने इसकी शुरूआत की थी.
विक्रम संवत हिन्दू पंचांग में समय गणना की प्रणाली का नाम है। यह संवत ५७ ईपू आरम्भ होती है। इसका प्रणेता सम्राट विक्रमादित्य को माना जाता है। कालिदास इस महाराजा के एक रत्न माने जाते हैं।
बारह महीने का एक वर्ष और सात दिन का एक सप्ताह रखने का प्रचलन विक्रम संवत से ही शुरू हुआ | महीने का हिसाब सूर्य व चंद्रमा की गति पर रखा जाता है | यह बारह राशियाँ बारह सौर मास हैं | जिस दिन सूर्य जिस राशि मे प्रवेश करता है उसी दिन की संक्रांति होती है | पूर्णिमा के दिन ,चंद्रमा जिस नक्षत्र मे होता है | उसी आधार पर महीनों का नामकरण हुआ है | चंद्र वर्ष सौर वर्ष से 11 दिन 3 घाटी 48 पल छोटा है | इसीलिए हर 3 वर्ष मे इसमे 1 महीना जोड़ दिया जाता है |
यह चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन से शुरू होता है। वर्ष २०१3 (इसा) में यह १1 अप्रेल को शुरु हुआ।
महीनों के नाम[संपादित करें]
| महीनों के नाम | पूर्णिम के दिन नक्षत्र जिस्मे चन्द्रमा होता है |
|---|---|
| चैत्र | चित्रा , स्वाति |
| बैशाख | विशाखा , अनुराधा |
| जेष्ठ | जेष्ठा , मूल |
| आषाढ़ | पूर्वाषाढ़ , उत्तराषाढ़ , सतभिषा |
| श्रावण | श्रवण , धनिष्ठा |
| भाद्रपद | पूर्वाभाद्र , उत्तरभाद्र |
| आश्विन | अश्विन , रेवती , भरणी |
| कार्तिक | कृतिका , रोहणी |
| मार्गशीर्ष | मृगशिरा , उत्तरा |
| पौष | पुनवर्सु ,पुष्य |
| माघ | मघा , अश्लेशा |
| फाल्गुन | पूर्वाफाल्गुन , उत्तरफाल्गुन , हस्त |
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International Dev Sewa Samiti ' अन्तरराष्ट्रिय देव सेवा समिति "
देव समुदाय पुर्बी मधेश तराई नेपाल के बिषिस्ट एतिहासिक संस्कृतिक पहिचान भेल एक जाति अछ .|
समस्त देव, चौधरी & पौदार स्वजाति लोक्नीसब से बिनम्र अन्नुरोध अछ | जे कृपिया समस्त देव जाति अस्तितव के सवाल अछ
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