Monday, April 14, 2014

विक्रमादित्य संस्कृत

गुप्त राजा के लिए, चंद्रगुप्त II विक्रमादित्य देखें
विक्रमादित्य संस्कृतविक्रमादित्य (ई.पू.102 से 15 ईस्वी तक) उज्जैनभारत के अनुश्रुत राजा थे, जो अपने ज्ञान, वीरता और उदारशीलता के लिए प्रसिद्ध थे. "विक्रमादित्य" की उपाधि भारतीय इतिहास में बाद के कई अन्य राजाओं ने प्राप्त की थी, जिनमें उल्लेखनीय हैं गुप्त सम्राट चंद्रगुप्त द्वितीय और सम्राट हेमचन्द्र विक्रमादित्य (जो हेमु के नाम से प्रसिद्ध थे). राजा विक्रमादित्य नाम, विक्रमvikrama यानी "शौर्य" और आदित्य[[|Āditya]] , यानी अदिति के पुत्र के अर्थ सहित संस्कृत का तत्पुरुष है. अदिति अथवा आदित्या के सबसे प्रसिद्ध पुत्रों में से एक हैं देवता सूर्य, अतः विक्रमादित्य का अर्थ है सूर्य, यानी "सूर्य के बराबर वीरता (वाला)". उन्हें विक्रम या विक्रमार्क भी कहा जाता है (संस्कृत में अर्क का अर्थ सूर्य है).
विक्रमादित्य ईसा पूर्व पहली सदी के हैं. कथा सरित्सागर के अनुसार वे उज्जैन परमार वंश के राजा महेंद्रादित्य के पुत्र थे. हालांकि इसका उल्लेख लगभग 12 शताब्दियों के बाद किया गया था. इसके अलावा, अन्य स्रोतों के अनुसार विक्रमादित्य को दिल्ली के तुअर राजवंश का पूर्वज माना जाता है.[1][2][3][4][5]
हिन्दू शिशुओं में विक्रम नामकरण के बढ़ते प्रचलन का श्रेय आंशिक रूप से विक्रमादित्य की लोकप्रियता और उनके जीवन के बारे में लोकप्रिय लोक कथाओं की दो श्रृंखलाओं को दिया जा सकता है.

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