चन्द्र गुप्त मौर्य एक महान वैश्य-CHANDRAGUPTA MOURYA A GREAT VAISHYA
सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य एक वैश्य जाति माहुरी से सम्बन्ध रखता था। गुजरात का

राज्यपाल पुष्पगुप्त जो की उसका बहनोई था वह भी एक वैश्य था। गुप्त या
गुप्ता उपनाम केवल वैश्य ही प्रयोग करते थे , ओर करते हैं । चन्द्रगुप्त ने बाद
में जैन धर्म अपना लिया था, जैन पूरी तरह से एक वैश्य जाती हैं. १००% जैन वैश्य हैं।
माहुरी जाति अपने आप को चन्द्रगुप्त का वंशज मानती हैं। जो की बिहार के गया
जिले में निवास करती हैं। मौर्य उपनाम चन्द्रगुप्त को चाणक्य ने दिया था।

क्योंकि चन्द्रगुप्त कि माँ का नाम मुरा था। मुरा से ही मौर्य बना। चन्द्रगुप्त की पत्नी
एक वैश्य नगर सेठ की पुत्री थी। चन्द्रगुप्त की कुलदेवी माता लक्ष्मी थी।
जो की वैश्य समुदाय की कुल देवी मानी जाती हैं। चन्द्रगुप्त के समय में जो विदेशी
इतिहासकार भारत में आयें उन्होंने भी चन्द्रगुप्त को वैश्य ही बताया था।
इतिहास में उसका कही भी क्षत्रिय होने का प्रमाण नहीं मिलता हैं। नाही शुद्र होने का,
क्योंकि एक ब्रहामण चाणक्य कभी भी एक शुद्र को शिक्षा नहीं दे सकते थे।
राजा को हमेशा क्षत्रिय माना गया हैं, वैश्य समुदाय की अधिकतर जातियों की उत्पत्ति
क्षत्रियो से ही हुईं हैं। जो की एक इतिहास हैं। भारत मैं हर जाति व समुदाय का
शासन रहा हैं। आधुनिक इतिहासकारों को कोई भी राजा व सम्राट, वैश्य व शुद्र होना
हज़म नहीं होता हैं। चन्द्रगुप्त के पोते सम्राट अशोक की पत्नी भी एक वैश्य पुत्री थी।
ज़ाहिर हैं रिश्ते नाते आदमी अपने वर्ण या जातिं में ही करते रहे हैं। ये प्रमाण
सिद्ध करते हैं। कि चन्द्रगुप्त मौर्या और सम्राट अशोक वैश्य ही थे।
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